Highlights
- दिल्ली हाईकोर्ट ने CIC का आदेश रद्द किया
- DU ने निजता के अधिकार का दिया हवाला
- अदालत ने फरवरी में सुरक्षित रखा था फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने CIC के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें पीएम मोदी की बीए डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया था। यह मामला लंबे समय से कोर्ट में लंबित था और अदालत ने 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
दरअसल, नीरज नामक व्यक्ति ने RTI के तहत पीएम मोदी की स्नातक डिग्री की जानकारी मांगी थी। इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने 21 दिसंबर 2016 को आदेश जारी करते हुए DU को निर्देश दिया था कि वह 1978 में बीए पास करने वाले सभी छात्रों के अभिलेखों की जांच की अनुमति दे। इसी साल पीएम मोदी ने भी यह परीक्षा पास की थी। हालांकि 23 जनवरी 2017 को हाईकोर्ट ने CIC के आदेश पर रोक लगा दी थी।
बीते दिनों भी कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले में फैसला टाल दिया था। DU की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि केवल जिज्ञासा के आधार पर कोई भी व्यक्ति RTI के जरिए निजी जानकारी हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि CIC का आदेश निजता के अधिकार के खिलाफ है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
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सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा था कि अगर अदालत चाहे तो DU अपने रिकॉर्ड दिखाने के लिए तैयार है, लेकिन जानकारी को सार्वजनिक करना सही नहीं होगा। दूसरी ओर, RTI आवेदकों की ओर से पेश वकील ने कहा था कि प्रधानमंत्री की डिग्री सार्वजनिक करने में व्यापक जनहित जुड़ा हुआ है और RTI कानून के तहत यह जानकारी मिलनी चाहिए।