क्या महिला पर भी हो सकता है POCSO का केस? 50 की उम्र में भी यौन हिंसा का आरोप, हाईकोर्ट सख्त

POCSO एक्ट को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट का ताजा फैसला भारत में यौन अपराध कानूनों की समझ में बड़ी भूमिका निभा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कानून जेंडर न्यूट्रल है और महिलाएं भी इसके तहत आरोपित हो सकती हैं। जानिए क्या है पूरा मामला और क्या हैं इसके मायने।

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POCSO

Highlights

  • महिला पर भी यौन हिंसा या बलात्कार के आरोप लग सकते हैं.
  • कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ किया POCSO कानून जेंडर न्यूट्रल है.
  • कोर्ट ने आरोपी महिला की जमानत याचिका खारिज की.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बाल यौन शोषण से जुड़े संवेदनशील मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि POCSO (संरक्षण अवयस्क से यौन अपराध अधिनियम) कानून न तो केवल पुरुषों पर लागू है और न ही केवल महिलाएं पीड़ित ही हो सकती हैं। यह कानून जेंडर न्यूट्रल है यानी कोई भी व्यक्ति चाहे पुरुष हो या महिला अगर किसी नाबालिग के साथ यौन अपराध करता है तो उसके खिलाफ POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

सोमवार को अदालत ने इस बात की पुष्टि करते हुए एक पचास वर्षीय महिला की जमानत याचिका खारिज कर दी है जिस पर 13 साल के बच्चे के साथ शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगा था।

क्या कहा हाई कोर्ट ने

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि POCSO एक्ट की धारा 4 और 6 इस बात को स्पष्ट करती हैं कि अगर कोई व्यक्ति किसी नाबालिग को पेनेट्रेटिव या किसी भी तरह की यौन गतिविधि के लिए मजबूर करता है तो वह दोषी होगा। कानून की भाषा में किसी भी तरह की लैंगिक असमानता या भेदभाव का स्थान नहीं है। अदालत ने इस तर्क को भी सिरे से खारिज कर दिया कि यौन हिंसा या बलात्कार के आरोप केवल पुरुषों पर ही लग सकते हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि अगर अपराध हुआ है तो कानून चाहे जिस पर भी लागू हो उस पर आरोप लगाए जाने चाहिए।

क्या था मामला

यह घटना 2020 की है। आरोपी महिला अर्चना जब यह घटना घटी थी तब उसकी उम्र 48 साल थी। पीड़ित जो उस समय मात्र 13 साल का था उसका परिवार आरोपी के पड़ोस में रहता था। पीड़ित की मां अपने बेटे को उसके घर भेजती थी ताकि वह आरोपी महिला की इंस्टाग्राम पर पेंटिंग्स पोस्ट करने में मदद कर सके। आरोप है कि आरोपी महिला ने ही पीड़ित बच्चे को अपने घर बुलाने के लिए रिक्वेस्ट की थी।

कैसे हुआ अपराध का खुलासा

आरोप है कि आरोपी महिला ने मई और जून 2020 में दो बार पीड़ित नाबालिग को यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। बच्चे ने इस घटना के बाद तुरंत किसी को नहीं बताया। उसका पूरा परिवार उसी वर्ष दुबई चला गया। पीड़ित ने 2024 में दुबई में एक थैरेपिस्ट को अपनी समस्या बताई। थैरेपिस्ट की सलाह पर परिवार ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज कराते समय पीड़ित की उम्र 17 वर्ष थी। आरोपी महिला ने बच्चे को धमकाया भी था कि अगर उसने किसी को बताया तो दोनों मुश्किल में पड़ जाएंगे। खबर है कि आरोपी महिला का पति और बेटी विदेश में रहते हैं।

इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि POCSO एक्ट का दायरा बहुत व्यापक है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अगर किसी भी लैंगिक पहचान का हो फिर भी अगर वह नाबालिग के साथ यौन अपराध करता है तो उसे सजा मिल सकती है। यह फैसला समाज में फैली इस गलतफहमी को भी दूर करता है कि सिर्फ पुरुष ही यौन हिंसा के अपराधी हो सकते हैं। अब महिलाएं भी अगर ऐसे अपराध में शामिल हों तो उन पर भी कार्रवाई हो सकती है।