Highlights
- जैश-ए-मोहम्मद ने ई-वॉलेट्स से फंडिंग शुरू की
- EasyPaisa और SadaPay से पैसे जुटाए जा रहे हैं
- हर महीने 30 नए अकाउंट खोले जाते हैं
जैश-ए-मोहम्मद ने अब पैसों का इंतजाम करने के लिए नया तरीका अपना लिया है। भारत में लंबे समय से आतंक फैलाने वाला यह संगठन अब ई-वॉलेट्स का इस्तेमाल कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने उसके कई ठिकाने तबाह कर दिए थे। उसका मुख्यालय भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया था। इसके बाद यह आतंकी संगठन फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक जैश ने पाकिस्तान में प्रचलित ई-वॉलेट्स जैसे EasyPaisa और SadaPay के जरिए चंदा जुटाना शुरू कर दिया है। संगठन की रणनीति है कि पेमेंट्स को ट्रैक न किया जा सके। इसके लिए छोटे-छोटे अकाउंट्स बनाए जा रहे हैं। एक बार में ज्यादा पैसे किसी एक खाते में नहीं लिए जाते। यही वजह है कि जैश अब हर समय सात से आठ ई-वॉलेट्स एक्टिव रखता है।
इतना ही नहीं संगठन चार महीने के बाद पुराने अकाउंट्स बंद कर देता है। इसके बाद हर महीने लगभग 30 नए ई-वॉलेट अकाउंट्स खोले जाते हैं। इससे पाकिस्तान में आतंकवाद का नया ढांचा खड़ा हो रहा है। जानकारी के मुताबिक जैश इस बार करीब 3.9 अरब रुपये जुटाने की कोशिश कर रहा है। यह रकम मसूद अजहर के परिवार के खातों के जरिए इकट्ठी की जा रही है।
इस रकम से संगठन 313 सेंटर बनाने की तैयारी में है। पहले की तरह अब एक बड़ा मुख्यालय नहीं बनाया जाएगा। बल्कि भारत के हमलों से बचने के लिए कई छोटे-छोटे सैटेलाइट सेंटर तैयार किए जाएंगे। कुछ काम अंडरग्राउंड भी किए जाएंगे। जैश की यह रणनीति उसे भारत की कार्रवाई से बचाने के लिए बनाई गई है।
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खबर है कि जुटने वाली रकम में से करीब 1.23 अरब पाकिस्तानी रुपये ठिकाने बनाने में खर्च होंगे। बाकी का पैसा हथियार खरीदने और दूसरे आतंकी ऑपरेशन्स के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। भारत ने पहले भी जैश के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। अब उसकी नई चाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती साबित हो सकती है।