भारत सरकार के दखल से टली निमिषा प्रिया की सजा-ए-मौत, यमन प्रशासन ने दी राहत

भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में दी गई मौत की सजा पर फिलहाल रोक लग गई है। भारत सरकार और धार्मिक नेताओं की कोशिशों ने इस मामले में नई उम्मीद जगा दी है।

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निमिषा प्रिया की फांसी
निमिषा प्रिया

Highlights

  • भारत सरकार और दूतावास के प्रयास रंग लाए
  • धार्मिक नेता की मध्यस्थता से बातचीत का रास्ता खुला
  • ब्लड मनी के जरिए समाधान की कोशिश

भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में मौत की सजा सुनाई गई थी। यह मामला बीते कुछ हफ्तों से काफी चर्चा में था। लेकिन अब भारत सरकार की लगातार कोशिशों से एक बड़ी राहत मिली है। यमन प्रशासन ने फिलहाल उनकी फांसी पर रोक लगा दी है।

यह फैसला आज सुबह 10:30 बजे हुई एक अहम मीटिंग के बाद लिया गया। इस मीटिंग में केरल के मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के दोस्त और यमन के प्रभावशाली इस्लामिक लीडर शेख हबीब उमर भी मौजूद थे। इस बातचीत का उद्देश्य निमिषा प्रिया और मृतक तलाल अबदो मेहदी के परिवार के बीच कोई समझौता कराना था।

अदालत ने 16 जुलाई को निमिषा को दी थी मौत की सजा

दरअसल, यमन की अदालत ने 16 जुलाई को निमिषा को फांसी देने का आदेश दिया था। लेकिन भारत सरकार, यमन स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के प्रयासों के चलते यह सजा फिलहाल टाल दी गई है। अब परिजनों और वकीलों को समय दिया गया है ताकि वे ब्लड मनी के जरिए मृतक के परिवार को मुआवजा देने पर राजी कर सकें।

फिलहाल, तलाल अबदो मेहदी के परिवार ने ब्लड मनी लेने से इनकार किया है। लेकिन सरकार की कोशिश यही है कि किसी तरह बातचीत के जरिए हल निकाला जाए ताकि निमिषा की जान बचाई जा सके।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया था कि सरकार इस पर क्या कदम उठा रही है। केंद्र ने कहा कि यमन की कानूनी व्यवस्था भारत से अलग है, लेकिन फिर भी कोशिशें लगातार जारी हैं।

केरल के धार्मिक नेता की मध्यस्थता से बातचीत का रास्ता खुला

इस पूरे मामले में एक और अहम पहलु तब सामने आया जब केरल के सुन्नी लीडर अबू बकर मुसलियार ने यमन के अपने संपर्कों के जरिए इस संकट को हल करने की पहल की। उन्होंने अपने यमन स्थित मित्र शेख हबीब उमर से संपर्क कर इस मामले में मध्यस्थता के लिए राजी किया।

निमिषा प्रिया का मामला बेहद संवेदनशील है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अपने ऊपर हो रहे शोषण से तंग आकर तलाल को नींद की दवाएं दी थीं ताकि वह अपना पासपोर्ट वापस ले सकें। लेकिन दवा की ओवरडोज से तलाल की मौत हो गई और उन्हें सजा-ए-मौत सुनाई गई। अब भारत सरकार की सक्रिय भूमिका, धार्मिक नेताओं की मध्यस्थता और कानूनी प्रयासों से यह उम्मीद जगी है कि निमिषा की जान बचाई जा सकती है।