Highlights
- नगर निगम बनाएंगे कुत्तों के लिए खास फूड ज़ोन
- 25 साल बाद सरकार ने 2,500 करोड़ रुपये मंजूर किए
- मेनका गांधी ने फैसले को बताया वैज्ञानिक और ऐतिहासिक
Supreme Court Decision on Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर और देशभर में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि कुत्तों को स्थायी रूप से शेल्टर में नहीं रखा जा सकता। नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें उसी जगह छोड़ा जाएगा, जहां से पकड़ा गया। इस फैसले का स्वागत करते हुए पशु अधिकार कार्यकर्ता और बीजेपी नेता मेनका गांधी ने कहा कि यह निर्णय वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है और इससे आवारा कुत्तों को भी इंसानों की तरह जीने का अधिकार मिलेगा।
कोर्ट ने नगर निगमों को आदेश दिया है कि वे कुत्तों के लिए भोजन क्षेत्र (Feeding Zones) बनाएं और वहां साइनबोर्ड भी लगाएं। पशु अधिकार कार्यकर्ता और बीजेपी नेता मेनका गांधी ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है और कुत्तों के अधिकारों की रक्षा करेगा।
मेनका ने कहा कि अब तक भोजन क्षेत्र को लेकर कोई व्यवस्था नहीं थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इसे वैध बना दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आक्रामक कुत्ते की परिभाषा स्पष्ट करने की आवश्यकता है।
सड़क और पार्कों में खाना देना प्रतिबंधित
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक स्थानों जैसे सड़कों और पार्कों में कुत्तों को खाना देना प्रतिबंधित होगा। इसके लिए नगर निगमों को खास फूड ज़ोन बनाने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर स्ट्रे डॉग्स के लिए नीति बनाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस प्रक्रिया में पक्षकार बनाया है।
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गौरतलब है कि सरकार ने 25 साल बाद पहली बार एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम के लिए 2,500 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इससे कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल आवारा कुत्तों की स्थिति में सुधार लाएगा बल्कि इंसानों और जानवरों के बीच बेहतर तालमेल भी सुनिश्चित करेगा।