यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री पर 5 साल से अधिक सजा का केस, तो पद से हटना होगा — लोकसभा में नया विधेयक पेश

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लोकसभा में नया विधेयक पेश

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में एक ऐतिहासिक विधेयक पेश किया है। विधेयक के अनुसार अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री पर ऐसे अपराध में आरोप लगते हैं, जिसमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है तो उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना होगा। फिलहाल, देश के संविधान और आचार संहिता में ऐसे प्रावधान नहीं हैं और आरोप लगने के बाद मामला अदालत में लंबित रहने तक सांसद, विधायक या मंत्री अपने पद पर बने रह सकते हैं।

इस विधेयक को लेकर संसद में तीखी बहस छिड़ गई है। केंद्र सरकार का कहना है कि यह नियम राजनीति में शुचिता लाएगा और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। विपक्ष इस बिल को लोकतंत्र के खिलाफ संभावित मिसयूज और एकतरफा राजनीतिक एजेंडा बता रहा है।

अमित शाह ने दिया अपना उदाहरण

अमित शाह ने बहस के दौरान खुद अपनी जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि जब वे गुजरात में मंत्री थे तो उन पर आरोप लगाए गए। उन्होंने स्वेच्छा से पद से इस्तीफा दे दिया और अदालत के आदेशों का पालन किया। जब वे आरोपों से पूरी तरह मुक्त हुए, तभी फिर से राजनीतिक जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में शुचिता बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। यह बिल देश में करप्शन रोकने और पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष को लगता है कि यह विधेयक जल्दबाजी में पेश किया गया है तो इसे संसद की संयुक्त समिति के समक्ष भेजा जा सकता है। हर विरोध के लिए संवाद और वाद-विवाद का दरवाजा खुला है।

विपक्ष का तीखा विरोध

कांग्रेस, सपा, आरजेडी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और अन्य विपक्षी दलों ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है। विपक्ष का मानना है कि यह बिल लोकतंत्र के खिलाफ है और सत्तारूढ़ दल इसका इस्तेमाल विपक्ष के नेताओं को कमजोर करने के लिए कर सकता है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सबसे तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इस तरह का बिल देश में लोकतंत्र को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। यह सुपर इमरजेंसी की ओर कदम है। यह बिल विपक्षी सरकारों के खिलाफ हथियार की तरह काम करेगा।”

लोकसभा में कुछ विरोधी सांसदों द्वारा बिल की प्रतियां फाड़ी जाने की घटना भी सामने आई, जिससे सदन में हंगामा बढ़ गया। फिलहाल बिल की प्रतियां फाड़ने वाले सांसदों के नाम सामने नहीं आए हैं। चर्चा के दौरान सदन में हंगामा इतना बढ़ गया कि लोकसभा की कार्यवाही को 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।