छात्र आंदोलन को लेकर सरकार की सोच को लेकर निर्मला सीतारमण ने किया बड़ा खुलासा, बोलीं…

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केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्र आंदोलन पर सरकार का पक्ष मजबूती के साथ रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कभी भी छात्रों के इस प्रदर्शन को रोकने की कोशिश नहीं की। एक टीवी चैनल से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि युवाओं का किसी मुद्दे पर आवाज उठाना, इसको सकारात्मक नजरिए से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वह खुद जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा रही हैं और वह जानती हैं कि युवा उन मुद्दों पर संवेदनशील होते हैं, जिन्हें वे गलत मानते हैं। सरकार का काम छात्रों की बात सुनना और उनकी भावनाओं को समझना और समय पर कदम उठाना है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान होना चाहिए और सरकार ने इस सिद्धांत का पालन किया है।

जानकारी मिलते ही सरकार ने शुरू की कार्रवाई

पेपर लीक मामले पर बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि जैसे ही सरकार को घटना की जानकारी मिली, तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई। पेपर खरीदने और बेचने के आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना सरकार की पहली प्राथमिकता थी।

उन्होंने बताया कि दूसरी सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बचाना था। इसी कारण सरकार ने समय पर दोबारा परीक्षा आयोजित कराई, ताकि लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो। उनके अनुसार, अगर री-एग्जाम तय समय पर नहीं कराया जाता तो यह पूरे परीक्षा तंत्र की बड़ी विफलता मानी जाती।

नीट री-एग्जाम की पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व शिक्षा मंत्री ने किया

निर्मला सीतारमण ने कहा कि री-एग्जाम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया और परिणाम भी निर्धारित समय के भीतर घोषित किए गए। उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया। उनके मुताबिक, छात्रों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक फैसले समय पर लिए गए।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि री-एग्जाम और परिणाम घोषित होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं और आगे भी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुधार जारी रहेंगे।

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।